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Ardhnarishwar Stotram – श्री शङ्कराचार्य कृतं – अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्र

Ardhnarishwar Stotram ॥ श्री अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्र ॥ ( श्री शङ्कराचार्य कृतं ) चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय । धम्मिल्लकायै च जटाधराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ १ ॥   कस्तूरिकाकुंकुमचर्चितायै चितारजः पुंजविचर्चिताय । कृतस्मरायै विकृतस्मराय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ २ ॥   चलत्क्वणत्कंकणनूपुरायै पादाब्जराजत्फणीनूपुराय । हेमांगदायै भुजगांगदाय नम: शिवायै च नम: शिवाय ॥ ३ ॥ […]

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Shri Ganesha Pancharatnam – श्री गणेशपञ्चरत्नम् – मुदाकरात्तमोदकं

Shri Ganesha Pancharatnam ॥ श्री गणेश पंच रत्न स्तोत्र ॥ मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् । अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥१॥   नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरं नमत्सुरारिनिर्जरं नताधिकापदुद्धरम् । सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरं महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥२॥   समस्तलोकशंकरं निरस्तदैत्यकुञ्जरं दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम् । कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करं मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥३॥  

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Aarti Shri Ramchandra ki – श्री रामचन्द्र जी आरती

  Aarti Shri Ramchandra ki आरती श्री रामचन्द्र जी की आरती की जै श्री रघुवर जी की, सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥   दशरथ तनय कौशल्या नन्दन, सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन॥   अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन, मर्यादा पुरुषोत्तम वर की॥   निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि, सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि॥  

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Aarti Shri Satyanarayan ji Ki | श्री सत्यनारायण जी आरती

   Aarti Shri Satyanarayan ji Ki  जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा । Read more : Shri Vishnu Aarti Lyrics – श्री विष्णु आरती  रतन जड़ित सिंहासन, अदभुत छवि राजे । नारद करत नीराजन, घंटा वन बाजे ॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा,

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Jai Shani Dev Aarti – | श्री शनि देव आरती

॥ जय शनि देवा – श्री शनिदेव आरती ॥ जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा । अखिल सृष्टि में कोटि-कोटि जन, करें तुम्हारी सेवा । जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा ॥   जा पर कुपित होउ तुम स्वामी, घोर कष्ट वह पावे । धन

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Shri Ganesh Aarti: Jai Dev Jai Dev : श्री सिद्धिविनायक आरती

श्री सिद्धिविनायक आरती: जय देव जय देव सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची । नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची । सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची । कंठी झलके माल मुकताफळांची । जय देव जय देव..   जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति । दर्शनमात्रे मनः, कमाना पूर्ति जय देव जय देव ॥   रत्नखचित फरा

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Jai Kashyap Nandan Surya dev Aarti-जय कश्यप-नन्दन

Jai Kashyap Nandan Aarti in Sanskrit: || जय कश्यप नन्दन आरती || Jai Kashyap Nandan Aarti in Sanskrit    ” ऋषि कश्यप के पुत्र सूर्य देव की आरती ..” ॐ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन – तिमिर – निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥ जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी। दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥ जय

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Sankatmochan Hanuman Ashtak – संकट मोचन हनुमानाष्टक

Sankatmochan Hanuman Ashtak संकट मोचन हनुमानाष्टक बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों। ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो। देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो। को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥ बालि की त्रास

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Shri Radha Rani ki – आरती श्री वृषभानुसुता की

 Shri Radha Rani ki  श्री राधा रानी की आरती  श्री वृषभानुसुता  की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥ त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि । पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ॥ ॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥   मुनि मन मोहन मोहन मोहनि, मधुर मनोहर मूरति सोहनि । अविरलप्रेम अमिय रस

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Shri Brihaspati Dev Ji Ki Aarti – बृहस्पति देवा

॥ Shri Brihaspati Dev ji ki aarti ॥ जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा । छिन छिन भोग लगा‌ऊँ, कदली फल मेवा ॥ ॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा..॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी । जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥ ॥ ऊँ जय बृहस्पति देवा..॥ Read more : Shri Vishnu Aarti Lyrics – श्री

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Shiv Chalisa – श्री शिव चालीसा

Shri Shiv Chalisa        ॥ श्री शिव चालीसा ॥   हिन्दू धर्म में भगवान की प्रार्थना करने के लिए चालीसा का पाठ किया जाता हैं। शिव चालीसा में चालीस पंक्तियां होने के कारण इसे चालीसा कहते हैं। केवल शिव चालीसा के पाठ करने से ही भक्त को बहुत आसानी से भगवान की कृपा प्राप्त हो

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Hanuman Bahuk Lyrics | हनुमानबाहुक

  Hanuman Bahuk  – श्री हनुमान बाहुक –            “असाध्य रोग और सारे कष्ट बाधा निवारण के लिए हनुमान बाहुक का पाठ करें “ (श्रीमद्गोस्वामितुलसीदासकृत) ।। श्री गणेशाय नम:।। श्री जानकीवल्लभो विजयते  छप्पय  सिंधु-तरन, सिय-सोच-हरन, रबि-बालबरन-तनु। भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु।। गहन-दहन-निरदहन-लंक नि:संक, बंक-भुव । जातुधान-बलवान-मान-मद-दवन पवनसुव।। कह तुलसिदास सेवत सुलभ,

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