Spiritual

Maa Kamakhya Aarti – परम पूज्य गुरुमाता कामाख्य जी की आरती

Maa Kamakhya Aarti हे गुरु माता तेरी आरती गाऊं, रोम-रोम में तुम्हे बसाऊं । । माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं, रोम-रोम में तुम्हे बसाऊं । । हे गुरुमाता तेरी आरती गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।। हे गुरु माता तेरी आरती गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।। तुम हो शिव अर्धांगिनी माता, तंत्र […]

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Das mahavidya Stotra – श्रीमुण्ड-माला-तन्त्रे एकादश-पटले महाविद्या-स्तोत्रम्

Das Mahavidya Stotra, महाविद्या स्तोत्र के उच्चारण मात्र से समस्त कार्यों की सिद्धियों के साथ साथ मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है । इसका नित्य दिन पाठ के करने वाक् सिद्धि की प्राप्ति होगी है । इस Mahavidya Stotra का विशेष फल प्राप्त करने के लिए साधक को रात्रि के समय 11, 21 , 51

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Mundamala Tantrokta Mahavidya Stotram- मुण्डमालातन्त्रे महाविद्यास्तोत्रम्

Mundamala Tantrokta Mahavidya Stotram महाविद्यास्तोत्र का पाठ करने से तंत्र मंत्र , प्रेत बाधा से निवारण के साथ सर्व संकट का नाश स्वतः ही हो जाता है। इसका नित्य प्रति दिन जप करने से जातक के सर्व कामना सिद्ध हो जाते है। Mundamala Tantrokta Mahavidya Stotram महाविद्यामन्त्रः– हूँ श्रीं ह्रीं वज्रवैरोचनीये हुँ हुँ फट् स्वाहा

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Mahavidya Kavach – महाविद्या कवचम्

Mahavidya Kavach, मां श्री महाविद्या का कवच परम गोपनीय , भय को दूर करने वाला सर्वमंगल प्रदायक और जीवन की समस्त बाधाओं को दूर करने वाला है भगवान शंकर ने महा मुनि नारद के समक्ष इस कवच को सुनाया था अपनी मनोवांछित अभिलाषाओं की सिद्धि जाने वाले मनुष्यों को इस कवच का नित्य पाठ करना

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Saprayoga Mahavidya Stotram – श्री महाविद्यास्तोत्रम् सप्रयोग

Saprayoga Mahavidya Stotram , महाविद्या पाठ सुनने या पढ़ने से शीघ्र अति शीघ्र कार्य सिद्ध होना, अनिष्ट ग्रहों की शांति होती है एवं शत्रु विनाश शत्रु पर विजय पाना , भूत-प्रेत आदि बाधा दूर होना और आपके घर में बुरी नजर से बचना शत्रु पर विजय पाना , शत्रु द्वारा किया हुआ तंत्र-मंत्र प्रयोग से

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गुप्त श्री सिद्ध कुंजिका स्तोत्र – Siddha Kunjika Stotram

Siddha Kunjika Stotram महात्म :- Siddha Kunjika Stotram वास्तव में सफलता की कुंजी है। इसके बिन सप्तशती का पाठ पुर्ण नहीं माना जाता है। षट्कर्म में भी Siddha Kunjika Stotram रामबाण की तरह कार्य करता है परंतु जब तक इसकी ऊर्जा को साधक अपने में समाहित नहीं कर लेता है तब तक इस का पूर्ण

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Shri Shani Chalisa – श्री शनि चालीसा

  || Shri Shani Chalisa || || श्री शनि चालीसा || ॥ दोहा Shani Chalisa॥ “जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल, दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल, जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज, करहूँ कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज “ जयति जयति शनिदेव दयाला करत सदा भक्तन

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Gayatri Mantra | विभिन्न देवी – देवताओं के गायत्री मंत्र

ऋग्वेद में Gayatri Mantra को ॐ के समतुल्य बताया गया है हमारे सनातन धर्म में सभी देवी देवताओं के लिए विशेष मंत्र बताएं गए है , जिससे इनकी अराधना भी जाती है । किंतु इन मंत्रों के साथ साथ प्रत्येक देवी देवताओं के लिए Gayatri Mantra भी बताएं गए है , जिससे इसकी महत्ता और

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Sri Dakshinakali kavach – श्री दक्षिणकाली कवच

माँ श्री दक्षिणकाली का रूप भक्तों के लिए अत्यंत शुभ होती है और Sri Dakshinakali kavach का पाठ करने से इन्हें भक्ति से आसानी से माँ को प्रसन्न और सांनिध्य प्राप्त किया जा सकता है । Sri Dakshinakali kavach  उत्तरा तंत्र से लिया गया यह Sri Dakshinakali kavach है, जिसक ऋषि भैरव देवता दक्षिणा काली

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Sadhana ke Neyam – साधना में नियम

Sadhana ke Neya     Sadhana ke Neyam, साधना में नियम का बहुत महत्व होता है । साधाना में नियम Sadhana ke Neyam का पालन कर ही साधना की पूर्ण फल की प्राप्ति की कामना पूरी हो सकती है। नियम के बिना साधना की ही नहीं जा सकती हैं अर्थात् साधना पूर्ण नहीं होती है।

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Shri Ganpati Atharvashirsha – गणपत्यथर्वशीर्​षोपनिषत्

Shri Ganpati Atharvashirsha का नित्य पाठ करें से समस्त सुखों को प्राप्त किया जा सकता है। इस पाठ का प्रारंभ सप्ताह के बुधवार से प्रारंभ करता चाहिए । श्री गणपत्यथर्वशीर्​षोपनिषत् गणपत का अत्यंत प्रिय है। किसी कार्य में यदि सफलता प्राप्त करनी हो तो वह एक प्रयोग करें वह 3 महीने लगातार इस स्त्रोत का

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Madhurashtakam – श्रीमद्वल्लभाचार्यविरचितं मधुराष्टकं

मधुराष्टकम्-Madhurashtakam अधरं मधुरं वदनं मधुरंनयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।हृदयं मधुरं गमनं मधुरंमधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ 1 ॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरंवसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरंमधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ 2 ॥ Read more : Shri Vishnu Aarti Lyrics – श्री विष्णु आरती वेणु-र्मधुरो रेणु-र्मधुरःपाणि-र्मधुरः पादौ मधुरौ ।नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरंमधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥ 3 ॥ गीतं

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