Diwali 2025 – दीपावली पूजन विधि और शुभ मुहूर्त ( महालक्ष्मी और महाकाली )

Diwali 2025 का त्योहार प्रकाश का पर्व है, जो साधना, मंत्र जप और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित है। यह पर्व तीन दिवसीय होता है – धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), और अमावस्या की रात जिसे महारात्रि कहा जाता है।

Diwali 2025 दीपावली का महत्व और पर्व की संपूर्णता

इस बार की Diwali 2025 पूर्णकालीन अमावस्या के साथ आ रही है, जो कि सदियों बाद संभव हुआ है। इस कारण पूर्णकालीन अमावस्या रात्रि में पूजा-अर्चना का महत्व और बढ़ जाता है ।

Diwali 2025

Diwali 2025 के तीन प्रमुख दिन

धनतेरस (18 अक्टूबर 2025):

इस दिन त्रयोदशी तिथि है और शनिवार के दिन पड़ रही है। इस दिन तिल के तेल के दीपक दक्षिण दिशा में जलाने की परंपरा है ताकि यमराज की कृपा प्राप्त हो और बाधाएं दूर हों। साथ ही धनतेरस को स्वर्ण-चांदी की वस्तुओं की खरीदारी शुभ मानी जाती है।

नरक चतुर्दशी (19 अक्टूबर 2025):

इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। तिल के तेल के दीपक जलाकर घर के मंदिर और आस-पास के स्थानों को पवित्र किया जाता है। नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जी का विशेष पूजन एवं जयंती मनाने की परंपरा है।

महारात्रि (20 अक्टूबर 2025):

अमावस्या की रात को दिवाली की महारात्रि कहा जाता है। इस रात को महालक्ष्मी, महाकाली एवं महासरस्वती की पूजा होती है। यह रात्रि विशेष संध्या-कालीन शुभ मुहूर्त प्रदान करती है।

Diwali 2025 दिवाली पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त

शुभ मुहूर्त और दीपावली की तैयारी

दिन का शुभ मुहूर्त: 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 2:13 बजे से 3:44 बजे तक प्रतिष्ठान, दुकान, शोरूम आदि का उद्घाटन और पूजा की जा सकती है।

सायंकालीन मुहूर्त: 6:51 बजे से 8:48 बजे तक घर की पूजा और मंदिर में विधिपूर्वक विधि से अनुष्ठान संपन्न करें।

रात्रि का महानिशा मुहूर्त: रात्रि 1:19 बजे से 3:33 बजे तक महालक्ष्मी, महाकाली, और महासरस्वती की पूजा का श्रेष्ठ समय है।

पूजा सामग्री और विधि

पूजा के लिए घी का दीपक, तिल के तेल के दीपक, पंचगव्य, पंचोपचार सामग्री (धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, जल) का प्रयोग करें।

गणेश जी का पूजन पंचगव्य के शुद्धिकरण के बाद करें। गणेश अथर्वशीर्ष और श्रीसूक्त का पाठ अनिवार्य है।

महालक्ष्मी का अष्ट लक्ष्मी पूजन करें और श्रीसूक्त का 16 मंत्रों का पाठ करें।

इस रात्रि में हवन करने का विधान प्रचलित नहीं है, परंतु रात्रि में दिव्य पूजन और मंत्र जाप करने का विधान है।

पूजन के दौरान रुद्राक्ष माला से गणेश मंत्र का जाप करें, जिससे पूर्ण फल की प्राप्ति हो ।

आध्यात्मिक संदेश और जीवन का मार्गदर्शन, भक्ति और ज्ञान का संतुलन

दीपावली का पर्व केवल धन की प्राप्ति का नहीं, बल्कि कर्म, भक्ति, ज्ञान और साधना का पर्व है। केवल धन होने से जीवन पूर्ण नहीं होता, शांति, स्वास्थ्य, और सद्गुणों का होना आवश्यक है। गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार, जहां सुमति होती है वहां संपत्ति होती है, और जहां कुमति होती है वहां विपत्ति होती है। अतः सुमति, धर्म और भक्ति को जीवन में सर्वोपरि रखें।

Diwali 2025 के पर्व पर विशेष ध्यान देने योग्य बातें

तीन दिवसीय पर्व का पूर्ण लाभ

यह Diwali सैकड़ों वर्षों बाद पूर्णकालीन त्यौहार के रूप में मनाई जा रही है। इसलिए तीनों दिन—धनतेरस, नरक चतुर्दशी, और अमावस्या की महारात्रि—का विधिपूर्वक पालन करें। इससे घर में आय, समृद्धि, सुख-शांति, और आध्यात्मिक उन्नति सुनिश्चित होती है।

भैया दूज और भाई-बहन का पर्व

दीपावली के बाद भैया दूज का उत्सव भी पूर्ण दिन .चलता है, जिसमें बहनें अपने भाइयों की दीर्घायु और सुरक्षा की कामना करती हैं। यह त्यौहार भाई-बहन के पवित्र संबंधों का प्रतीक है।

लोकाचार और शास्त्रों का पालन

दीपावली पर स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए शास्त्रों द्वारा निर्देशित पूजा विधि का पालन करें। पूजा के दौरान साफ-सफाई, शुद्ध सामग्री और उचित मुहूर्त का ध्यान रखना आवश्यक है।

Diwali दीपावली पर उपासना और आध्यात्मिक समृद्धि

दीपावली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और कर्म की साधना का पर्व है। इस वर्ष की दिवाली पूर्णकालीन अमावस्या के दौरान आ रही है, जो सदियों से दुर्लभ अवसर है। हनुमान जयंती के साथ-साथ धनतेरस और नरक चतुर्दशी के दिन तिल के तेल के दीपक जलाकर, गणेश और महालक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करके आप अपने जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य, और शांति ला सकते हैं।

ध्यान रखें कि भक्ति, ज्ञान और कर्म के बिना धन का कोई स्थायी मूल्य नहीं है। इसलिए दीपावली के इस पावन पर्व पर अपने जीवन को धर्म, भक्ति और साधना से परिपूर्ण बनाएं। आपकी दिवाली मंगलमय और शुभ हो।

जय श्री कृष्ण, जय गंगा मैया, जय हर हर महादेव।

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