Maa Kamakhya Aarti

हे गुरु माता तेरी आरती गाऊं, रोम-रोम में तुम्हे बसाऊं । । माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं, रोम-रोम में तुम्हे बसाऊं । ।
हे गुरुमाता तेरी आरती गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।। हे गुरु माता तेरी आरती गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।।
तुम हो शिव अर्धांगिनी माता, तंत्र मंत्र की तुम हो ज्ञाता।। -2 इन चरणों मे शीश झुकाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।।
हे गुरु माता तेरी आरती गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।।
हाथों में वीणा मुकुट सिर साजे, धाम करौली में माँ बिराजे हाथों में वीणा मुकुट सिर साजे, धाम करौली में माँ बिराजे
मधुर मधुर स्वर में मैं गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।।
हे गुरु माता तेरी आरती गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।।
कमलासन पर रहने वाली, माँ तारा तुम हीं महाकाली ।।कमलासन पर रहने वाली, माँ तारा तुम हीं महाकाली ।। धूप दीप के थाल सजाऊँ, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।।
हे गुरु माता तेरी आरती गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।।
तुम हो हिमालय की महारानी, कष्ट हरो हे जग कल्याणी ।। -2
हर क्षण मात तेरे ही गुण गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।।
हे गुरु माता तेरी आरती गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं।।-2
जो जन तेरी आरती गाए, कहे सन्तोष जी अति सुख पावे । । -2
नयन विशाल इनमें खो जाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।।
हे गुरु माता तेरी आरती गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।।
हे गुरु माता तेरी आरती गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।।
हे गुरु माता तेरी आरती गाऊं, माता कामाख्या तेरी आरती गाऊं ।
